शायरी
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| हिंदी लव शायरी |
मैंने सोचा मेरी मेहबूब भी ओरो की तरह बेवाफा निकली
जब उसकी डोली मेरे घर के दरवाजे से निकली
पता तो तब चला उसकी सच्ची मोहब्बत का
जब मेरे जनाजे के पीछे उसकी अर्थी निकली ।।
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अब मुझसे तुम्हे भुलाया नहीं जाएगा
अब ओर आंखों से आशू बहाया नहीं जाएगा
सच्ची मोहब्बत करते है तुमसे
इसलिए तुम्हें , मुझसे बेवाफा भी नहीं कहा जाएगा ।।
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जब तुम्हारी गली से निकले हम
जैसे लगा बागीचे से गुजरे हम
जब देखा तुम्हें किसी ओर के बांहों में
तब सोचा कहा प्यार के दलदल में आ फसे हम
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वो इश्क कैसा जिसमें दर्द ना हो
वो जाम कैसा जिसमें कोई रस ना हो
वो सच्चा आशिक़ ही कैसा जो प्यार में बदनाम ना हो
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चाहे मेरी पुरी उम्र, उसको लग जाए
चाहे उसको मनाने में पूरा summar लग जाए
बस ख्वाइश है मेरी,
इस बरसात के सुहानी मौसम में एक बार
उसका दीदार हो जाए
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2 टिप्पणियाँ
Radhe Krishna
जवाब देंहटाएंगजब भाई
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